काफी दिनों के बाद बिहार से कुछ अच्छा सुनने को मिला।जी हाँ.. शराब-बंदी...! आगे का पता नहीं पर जिस प्रकार सरकार ने इसे योजनाबद्ध तरीके से और समय तय करके बंद करवाया है, उम्मीद की किरण दिख रही है। शराबबंदी बिहार में क्यूँ जरुरी था? यूँ तो भारत के अधिकांश राज्य में शराबबंदी अत्यावश्यक है।परंतु, पूर्णतः कृषि पर निर्भर, अल्प साक्षरता वाला तथा निम्न आय वर्ग की अधिकता वाले इस राज्य में ये एक अभिशाप स्वरूप था, जो धीरे-धीरे परिवार और समाज को निगलता जा रहा था। बढ़ते अपराध और खास कर युवा वर्ग में इसका प्रचलन राज्य समाज को पीछे धकेल रहा था। महिलाओं की स्थिति में भी सुधार की आशा की जा सकती है, जो वर्तमान सरकार का एक चुनावी वायदा भी था। कुछ बुद्धजीवियों ने राजश्व में भारी कमी की चिंता जताई। वस्तुतः ये सच है परंतु आप इसको लेकर मानव जीवन को दांव पर नहीं लगा सकते है। एक स्वस्थ समाज की कल्पना को साकार करने में कुछ मुश्किलें तो आयेंगी। केंद्र और बांकी सारे राज्य सरकार की कदम की सराहना कर रहे है। शराब में लगने वाले पैसे के बचने से परिवार की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा जो समाज और राज्य के विकाश के लिए श...