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Showing posts from 2016
बेटी नहीं हम, संतान तुम्हारे, अब ये दूरी घटने दो, घुट रहें हैं सदियों से, इक पल के लिए जीने दो, बाँध रखा है पंख जिनमें, अब वो बेड़ी खुलने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2 एक बेटे की लालच में, आने ना दिया संसार में,ये बताओ कौन लाया था तुम्हें संसार में, कभी तुम्हारे रिवाज ने मारा, कभी तुम्हारे प्यार ने, जो बचे उनको मारा, झूठे शान और संस्कार ने, बहुत कर लिया ढोंग प्रेम का, अब तो बस रहने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2 दंभ भरते हो पुरुषार्थ का, होता क्या है वो भला, जीत तुमको तब मिली है, जब शक्ति बनी है ये अबला, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सेवा में हमसे आगे कौन है, पर है मुस्किल तुम्हें बताना, अब तक संसद भी मौन है, 21वीं सदी में आ गए तुम, अब तो बस रहने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2
राह मुश्किल है डगर की , गिरके उठना है मगर दर्द देनेवाले जब पूछे चोट खाई है किधर , गिर के उठना , उठ के चलना , चुप ही रहना तुम मगर , धड़कते दिल से बस ये कहना , ऐ दिल तू चुपके निकल , ऐ दिल तू चुपके निकल। रंग बदलती इस दुनियां में , ऐ दोस्त जरा चलना संभल , लोगों की चिकनी बातों में , कहीं ना जाना तुम फिसल , मतलबी के चक्कर में अपनों से जाना न दूर निकल , धड़कते दिल से बस ये कहना , ऐ दिल तू चुपके निकल , ऐ दिल तू चुपके निकल। हाल पूछे रोज तेरा , हाल पर हंस के तेरे , बातें जग की करे सारे , अपने हित पे वो मरे , सच की जीत होती जग में , क्यूं रे बन्दे तू डरे , रख भरोसा उस रब पर और मकड़जाल से तू निकल , धड़कते दिल से बस ये कहना , ऐ दिल तू चुपके निकल , ऐ दिल तू चुपके निकल।
काफी दिनों के बाद बिहार से कुछ अच्छा सुनने को मिला।जी हाँ.. शराब-बंदी...! आगे का पता नहीं पर जिस प्रकार सरकार ने इसे योजनाबद्ध तरीके से और समय तय करके बंद करवाया है, उम्मीद की किरण दिख रही है। शराबबंदी बिहार में क्यूँ जरुरी था? यूँ तो भारत के अधिकांश राज्य में शराबबंदी अत्यावश्यक है।परंतु, पूर्णतः कृषि पर निर्भर, अल्प साक्षरता वाला तथा निम्न आय वर्ग की अधिकता वाले इस राज्य में ये एक अभिशाप स्वरूप था, जो धीरे-धीरे परिवार और समाज को निगलता जा रहा था। बढ़ते अपराध और खास कर युवा वर्ग में इसका प्रचलन राज्य समाज को पीछे धकेल रहा था। महिलाओं की स्थिति में भी सुधार की आशा की जा सकती है, जो वर्तमान सरकार का एक चुनावी वायदा भी था। कुछ बुद्धजीवियों ने राजश्व में भारी कमी की चिंता जताई। वस्तुतः ये सच है परंतु आप इसको लेकर मानव जीवन को दांव पर नहीं लगा सकते है। एक स्वस्थ समाज की कल्पना को साकार करने में कुछ मुश्किलें तो आयेंगी। केंद्र और बांकी सारे राज्य सरकार की कदम की सराहना कर रहे है। शराब में लगने वाले पैसे के बचने से परिवार की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा जो समाज और राज्य के विकाश के लिए श...