समय का पहिया, घूमे रे भैया, समय ही होता बलवान, राजा हो या रंक फकीरा, इस चक्र में सब हैं एक समान। उसी पिता के सभी हैं बच्चे, फिर भी क्युं है अभिमान, लक्ष्मी तो है सदैव चंचला, उस पर करना क्या गुमान, ना होता है कोई गरीब और ना होता कोई धनवान, समय का तो ये बस चक्र है,इस चक्र में सब है एक समान। ज्ञान का दंभ भरने वाले , कभी तो देखो आसमान, ना अंत है जिसका कोई , फिर भी कहाँ है उसे गुमान, धन और तन का साथ तनिक है, यौवन का ना रखो संज्ञान, ढल जायेगा समय चक्र में, इस चक्र में सब है एक समान। स्वर्ग - नरक में कहां भटकता, छोड़ दे ये अज्ञान, कर्म किए जा ऐसे रे बंदे, कल को याद रखे इंसान, मात-पिता भगवान हमारे, मातृभूमि स्वर्ग समान, समझ सको तो समझ लो प्यारे, समय बड़ा बलवान।
बेटी नहीं हम, संतान तुम्हारे, अब ये दूरी घटने दो, घुट रहें हैं सदियों से, इक पल के लिए जीने दो, बाँध रखा है पंख जिनमें, अब वो बेड़ी खुलने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2 एक बेटे की लालच में, आने ना दिया संसार में,ये बताओ कौन लाया था तुम्हें संसार में, कभी तुम्हारे रिवाज ने मारा, कभी तुम्हारे प्यार ने, जो बचे उनको मारा, झूठे शान और संस्कार ने, बहुत कर लिया ढोंग प्रेम का, अब तो बस रहने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2 दंभ भरते हो पुरुषार्थ का, होता क्या है वो भला, जीत तुमको तब मिली है, जब शक्ति बनी है ये अबला, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सेवा में हमसे आगे कौन है, पर है मुस्किल तुम्हें बताना, अब तक संसद भी मौन है, 21वीं सदी में आ गए तुम, अब तो बस रहने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2