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Showing posts from July, 2015
विविधताओं में एकता का देश है हमारा भारत.रहन-सहन , खान-पान , जाति-धर्म से लेकर भाषायी भिन्नता भी पायी जाति हैं. करीब 780   भाषाएँ यहाँ बोली जाती है और The People's Linguistic Survey of India (PLSI) के सर्वे के अनुसार 250   से अधिक भाषाएँ लुप्त हो चुकी हैं. भाषयी विविधताओं वाले इस देश में एक उपयुक्त शिक्षा नीति का होना आवश्यक है. भारत सरकार ने प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 में लागु किया , उसके बाद समय-समय पर 1986 में स्व. श्री राजीव गांधी के समय में और पुनः 1992 में संशोधित किया गया. शिक्षा... एक ऐसा विषय , जो भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश के लिए काफी मायने रखता है.  भारतीय नागरिकों को मताधिकार सिर्फ उम्र के आधार पर प्रदान की गयी है. शिक्षा को हमेशा भारतीय राजनेताओं के द्वारा दूसरे दर्जे पर रखा गया. भारतीय नागरिक जिसे किसी भी भाषा में लिखने-पढ़ने का ज्ञान को शिक्षित मान लिया जाता है. क्या उस व्यक्ति में देश के राजनीती , देश के अंदर-बाहर हो रही गतिविधियों का सर्वेक्षण की क्षमता होती है ? क्या वो व्यक्ति अपने अधिकार और कर्तव्य को सही ढंग से समझ सकता है.. ? और जब एक नागर...