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Showing posts from September, 2016
बेटी नहीं हम, संतान तुम्हारे, अब ये दूरी घटने दो, घुट रहें हैं सदियों से, इक पल के लिए जीने दो, बाँध रखा है पंख जिनमें, अब वो बेड़ी खुलने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2 एक बेटे की लालच में, आने ना दिया संसार में,ये बताओ कौन लाया था तुम्हें संसार में, कभी तुम्हारे रिवाज ने मारा, कभी तुम्हारे प्यार ने, जो बचे उनको मारा, झूठे शान और संस्कार ने, बहुत कर लिया ढोंग प्रेम का, अब तो बस रहने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2 दंभ भरते हो पुरुषार्थ का, होता क्या है वो भला, जीत तुमको तब मिली है, जब शक्ति बनी है ये अबला, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सेवा में हमसे आगे कौन है, पर है मुस्किल तुम्हें बताना, अब तक संसद भी मौन है, 21वीं सदी में आ गए तुम, अब तो बस रहने दो, हो गयी इम्तिहां का हद, [अब तो मुझे उड़ने दो]2
राह मुश्किल है डगर की , गिरके उठना है मगर दर्द देनेवाले जब पूछे चोट खाई है किधर , गिर के उठना , उठ के चलना , चुप ही रहना तुम मगर , धड़कते दिल से बस ये कहना , ऐ दिल तू चुपके निकल , ऐ दिल तू चुपके निकल। रंग बदलती इस दुनियां में , ऐ दोस्त जरा चलना संभल , लोगों की चिकनी बातों में , कहीं ना जाना तुम फिसल , मतलबी के चक्कर में अपनों से जाना न दूर निकल , धड़कते दिल से बस ये कहना , ऐ दिल तू चुपके निकल , ऐ दिल तू चुपके निकल। हाल पूछे रोज तेरा , हाल पर हंस के तेरे , बातें जग की करे सारे , अपने हित पे वो मरे , सच की जीत होती जग में , क्यूं रे बन्दे तू डरे , रख भरोसा उस रब पर और मकड़जाल से तू निकल , धड़कते दिल से बस ये कहना , ऐ दिल तू चुपके निकल , ऐ दिल तू चुपके निकल।