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आजादी के मायने

गुलामी की बेड़ी तोड़ चुके हम, 69वें वर्ष में आ तो गए हम, 15 अगस्त की छुट्टी मनाकर, आसमान में पतंग उड़ाकर, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

सत्य-अहिंसा के बुनियाद पर, राम-राज्य की कल्पना लेकर, बापू ने जो सपने सजाये, उस सपने को सपना बनाकर, बापू को फ़ोटो में सजाकर, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

सबको अन्न खिलाने वाले खुद मौत को गले लगाए, उनकी मेहनत के पैसे से उनके ही के नेता मौज उड़ाए, सबको अन्न देने वाले आज खुद ही गरीब कहलाए, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

स्वदेशी का राग छोड़कर विदेशी धुन पर नाचे-गाए, महान् शहीदों की कुर्बानी जब ऐसे ही व्यर्थ में गंवाए, देश की रक्षा करने वाले बस सड़क पर सिटी बजाये, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

देश को एकजुट करनेवाले नेता ही जब जातिवाद का जाल फैलाए, सम्प्रदायवाद के बुनियाद पर वोट बैंक की राजनीति चलाए, देश की जनता की पैसे से संसद का माखौल बनाए, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

देश की शान बढाने वाले जब देश का ही नाम डुबाए, राष्ट्रीय खेल बनकर भी हॉकी जब कुछ राज्यों में खेला जाए, चयन से लेकर खेलने तक में जब पैसा अपना जलवा दिखाए, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

राम-कृष्ण की पुण्य धरा पर, बुद्ध- महावीर-नानक आए, देश ही नहीं पूरी दुनिया पर अहिंसा और प्रेम का संदेस लाए, पर आज इसी भूमि पर देखो धर्म का कैसे धंधा चला है, आप बताएं मेरे देशवाशियों क्या सच में हम आजाद हैं ?

जागो मेरे देश वाशियों, अब खुद को समझाना है, प्यार, अहिंसा, सत्य और भाईचारा को पुरे जग में फैलाना है, हमारी आजादी का ये मतलब अब सबको बतलाना है।

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