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राह मुश्किल है डगर की, गिरके उठना है मगर
दर्द देनेवाले जब पूछे चोट खाई है किधर,
गिर के उठना, उठ के चलना, चुप ही रहना तुम मगर,
धड़कते दिल से बस ये कहना, ऐ दिल तू चुपके निकल, ऐ दिल तू चुपके निकल।

रंग बदलती इस दुनियां में, ऐ दोस्त जरा चलना संभल,
लोगों की चिकनी बातों में, कहीं ना जाना तुम फिसल,
मतलबी के चक्कर में अपनों से जाना न दूर निकल,
धड़कते दिल से बस ये कहना, ऐ दिल तू चुपके निकल, ऐ दिल तू चुपके निकल।

हाल पूछे रोज तेरा, हाल पर हंस के तेरे,
बातें जग की करे सारे, अपने हित पे वो मरे,
सच की जीत होती जग में, क्यूं रे बन्दे तू डरे,
रख भरोसा उस रब पर और मकड़जाल से तू निकल,
धड़कते दिल से बस ये कहना, ऐ दिल तू चुपके निकल, ऐ दिल तू चुपके निकल।

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